बेरोज़गारी
पढ़ा - लिखा सुनील अपना सर झुकाये गहरी चिंता में बैठा था।
मेज़ पर पसरी MA की डिग्री उसका उपहास उड़ा रही थी।
बहुत कोशिश करने के बाद भी उसे कोई भी नौकरी नहीं मिल पा रही थी।
घर से बाहर निकला तो चाय की ढ़परी पर चिपके इश्तिहार पर उसकी निगाह जम गयी।
इश्तिहार पर लिखा था ," " सड़कों पर गड्ढे खोजे , उनकी तस्वीर निम्न वेबसाइट पर अपलोड करें और 5000/ रूपये का इनाम पाए ; यानी एक गड्ढे की सूचना देने पर 5000/ रूपये । "
सरकारी विज्ञापन पढ़ कर सुनील की आँखें चमक उठी और वह गड्ढे की खोज में सड़क नापने लगा। कई मील सड़क नापने पर भी जब उसे कोई गड्ढा नहीं मिला और सूरज सर पर आन खड़ा हुआ तो उसने अपने माथे का पसीना पौछा , अपने ख़ाली पेट को पानी पिलाया और वही बाच सड़क में लगा गड्ढा खोदने .© इन्दुकांत आंगिरस