Eradicate illiteracy with the lamps of letters.
Books are the passages to knowledge and Libraries, the house of books are the temples of knowledge.
A house without books is a temple without God.
Books are the passages to knowledge and Libraries, the house of books are the temples of knowledge.
A house without books is a temple without God.
Technology can change the world but it is controlled by MAN.
Design is like make up which attracts everyone.
Branding makes You unique in Crowd.
Every creation is an ART and Art should reach everyone as it can transform people.
Each step towards destination is as important as our garden flower which needs mud , water and Sunlight to blossom.
Personal Interests
Since childhood, I have had a passion for collecting stamps. I used to keep postage stamps in a stamp album. Over time, I stopped collecting stamps actively, but I still collect them whenever possible. This hobby gives me joy and enriches my knowledge.
Since childhood, I enjoyed collecting coins and keeping them in a gullak. I could not develop this hobby professionally, but I still have a good collection of Indian and international coins and notes.
I learnt chess at the age of 6. First, I learnt national chess and then international chess. I played with friends and colleagues, but never as a professional player. I still enjoy playing chess.
Carrom has been my favourite game since childhood. It is always fun to play. I played with friends and colleagues, but never as a professional player.
I learnt this game at the age of 20. I played at Connaught Place, Vasant Vihar Club, Hinduja Club, and Surat Club. I still enjoy playing this wonderful game.
Music has always been a meaningful part of life. It brings peace, creativity, rhythm, and emotional connection. Listening to music and engaging with melodies gives joy and inspiration.
Community of Creators
“ श्री इंदुकांत अंगिरस एक जाने-माने शाइर होने के अलावा साहित्य की अन्य विधाओं में भी ख़ासा दखल रखते हैं। उनकी कविताएँ, दोहे, लेख भी समय समय पर साहित्यिक दुनिया की नज़रों से गुज़रे हैं और जिसके लिए उन्होंने भरपूर दाद पाई है। मैं यहाँ यह भी साझा करना चाहूँगा कि हिन्दी, उर्दू के अलावा इंदुकांत जी की अंग्रेजी, हंगेरियन जैसी विदेशी भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ है। कई विदेशी भाषाओं की कविताओं का इन्होंने हिन्दी में अनुवाद किया है जिसे साहित्यिक जगत में बहुत सराहा गया है। मुझे याद पड़ता है कि एक मशहूर लिथुआनियाई चित्रकार की बनाई हुई तस्वीरों पर उन्होंने हिन्दी में कविताएं लिखी और इन कविताओं को एक किताब का रूप दिया जो एक विलक्षण प्रयोग है और बहुत पसंद किया गया है। इसके अलावा इंदुकांत जी नियमित तौर पर यू-टयूब पर 'सात-सुर' के नाम से इंतख़ाबी अशआर पोस्ट करते हैं जिसमें हिंदुस्तान के नामचीन, मशहूर-ओ-मारूफ़ शाइरोंंके अलावा नए और गुमनाम शाइरों के अशआर होते हैं। धीरे-धीरे ये भी शाइरी पसंद लोगों में एक मुकाम हासिल करता जा रहा है। अंत में यह कह कर अपनी बात को विराम दूँगा कि प्रभु भाई इंदुकांत अंगिरस को अच्छा स्वास्थ्य और लम्बी उम्र दें ताकि ये लम्बे समय तक साहित्य की इसी प्रकार सेवा करते रहें। ”
सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी इन्दुकान्त जी न केवल भारत बल्कि विदेश में भी एक प्रतिष्ठित साहित्यकार के रूप में अपने को स्थापित कर चुके हैं। वे हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू , बाँग्ला, हंगरी आदि कई देशी विदेशी भाषाओं के ज्ञाता हैं। जीवन का महत्वपूर्ण भाग विदेश में गुज़ार चुके इन्दुकान्त जी मुक्तक, हाइकु, लघुकथायें आदि लिखकर साहित्य की निरन्तर सेवा कर रहे हैं। उनके लेखन में चुटीलापन है यही कारण है कि प्रकाशन की दुनिया में उनके साहित्य की माँग निरन्तर बनी हुई है। उनके पिता श्री और दादा श्री संस्कृत और हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वान थे तभी तो विद्वता उन्हें विरासत में प्राप्त हुई है। आप देश के.लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों का साक्षात्कार यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण करते हैं। आप सहज एवं सरल स्वभाव के धनी हैं जिसके कारण लोग आपकी तरफ नि:शंकोच आकर्षित होकर आपके मित्र बन जाते हैं। आप में निरन्तर कुछ नया सीखने और नया करने का विशेष गुण है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। राम अवध विश्वकर्मा ग्वालियर
लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र की अज़ीम शख़्सियत है इन्दुकांत आंगिरस । राजधानी नई दिल्ली में पैदा हुए और पले बड़े हुए ; बैंगलोर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार इन्दुकांत अंगिरस आज के वैज्ञानिक युग में लेखन, पत्रकारिता, पुस्तक समीक्षा और प्रकाशन के क्षेत्र में अपनी अमित छाप छोड़ रहे हैं। वह पिछले कई वर्षों से अपने आप को स्थापित करने के लिए कड़े संघर्ष का सामना कर रहे हैं। लेकिन फ़िर भी उन्हें अभी तक अपनी प्रतिभा और अनुभव के अनुसार वह सफलता नहीं मिल पाई है जिसके सही मानों में वह हक़दार है। मैं व्यक्तिगत तौर पर इन्दुकांत आंगिरस जी को पिछले 2-3 साल से जानता हूँ । वह एक अच्छी सूझ - बूझ वाले दूरदर्शी, प्रतिभावान, अनुभवी, परिश्रमी और संघर्षशील व्यक्ति हैं। वह परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली एवं सनद फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और पुस्तकम प्रकाशन के मालिक हैं। डॉ सैयद अली अख़्तर नक़वी अध्यक्ष - हिन्दी - उर्दू अदबी संगम , दिल्ली ।
जब से परिचय हुआ है इन्दुकांत आंगिरस जी का साहित्यिक व्यक्तित्व मुझे हमेशा सक्रियता की एक ऐसी मिसाल लगा है जो बहुत ही जीवंत और प्रेरणादायी है। अनेक भाषाओं के ज्ञाता और अनेक विधाओं में अपना निरंतर रचनात्मक सहयोग देने वाले ये हमारे प्रिय और महत्वपूर्ण लेखक हैं। अनुवाद और सम्पादन के क्षेत्र में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है। अभिव्यक्ति की नयी तकनीक से जुड़े हुए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में इनका योगदान हमें समृद्ध करता रहेगा। दिविक रमेश , दिल्ली।
इन्दुकांत आंगिरस मेरी नज़र में - पुरानी मुलाक़ात तो नहीं कह सकता लेकिन नई भीं तो नहीं है, ऐसे मस्त मौला साहित्यकार कवि और साहित्य प्रेमी की साहित्य यात्रा सचमुच काबिले तारीफ़ ही है कि ख़ुद को औरों के लिये समर्पित करना जिनकी सब से बड़ी खासियत है. आज के दौर में इन्दुकांत जैसे अदब नवाज़ सरफिरो का अलग ही मुकाम है। - डॉ विजेंद्र ग़ाफ़िल भिवानी - हरियाणा
इंदुकान्त आंगिरस बहुआयामी प्रतिभा के धनी एक अच्छे कवि हैं। उनकी अनेक पुस्तकें मेरे पास हैं। अधिकांशतः छंद मुक्त विचार कविताएँ लिखते हैं। उनकी प्रेम कविताएँ तो अद्भुत हैं। अनुभव पगी हैं और प्रेम के इंद्रधनुषी रंगों से सजी हैं। गज़लों में भी उनका अपना अंदाज़ है। अपने ही रंग और मिज़ाज की उनकी ग़ज़लों ने मुझे ख़ूब प्रभावित किया है। एक अच्छी और महत्वपूर्ण बात ये है कि वे अपनी हर रचना में स्वयं भी मौजूद लगते हैं। रचना में रचनाकार की मौजूदगी रचना को बड़ा और मौलिक बना देती है। उनकी अनेक रचनाओं का हंगेरियन भाषा में भी अनुवाद हो चुका है। वे जितने अच्छे रचनाकार हैं उतने ही नेक इंसान भी हैं। यारों के यार हैं। उनके प्रियदर्शी व्यक्तित्व पर स्मित मुस्कान आकर्षक लगती है। - नरेश शांडिल्य : कवि, नाट्यकर्मी, संपादक, समीक्षक
इन्दुकांत आंगिरस को मैं बहुत पहले से जानती हूँ , तब से जानती हूँ जब से उन्होंने लिखना प्रारंभ किया और प्रारंभिक लेखन ही उनका इतना प्रभावी था कि मैंने उनकी लिखी कविता की चंद पंक्तियो को अपनी एक कहानी में उद्धृत किया था " बोएंगे बबूल तो कैसे उगेंगे गुलाब / किसी ने भी कहीं हो बात ग़लत है जनाब/ ईश्वर को देखिये , ख़ुदा को देखिये / फसल इंसान की बो रहा है और पैदा दरिंदा हो रहा है ।" इन्दुकांत जी की ये पंक्तियाँ मैंने 1988 में अपने प्रकाशित कहानी संग्रह "एक और भगवान" में शामिल की थी और तब से अब तक मैं इनकी कई रचनाएँ पढ़ चुकी हूं। आपका सार्थक सृजन समाज को प्रकाशित करता है, प्रोत्साहित करता है । जहाँ आपका साहित्यिक सफ़र अनुकरणीय है, वहीं समाज में आपकी सोच भी सराहनीय है। आप नई वेबसाइट शुरू करने जा रहे हैं मुझे आशा है आपको अपार सफलता मिलेगी, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ । हरियाणा गौरव डॉ सविता चड्ढा
"जीवन में कामयाब होना है तो अपनी अंदर की शक्ति को जगाना होगा .. आप का व्यक्तित्व बताता है कि आप कितना लगनशील और जानने के लिए कितना कोशिश करते हैं " यह कथन है आदरणीय इंदुकांत अंगिरस जी का।ऊँचे व्यक्तित्व के धनी इंदुकांत अंगिरस जी के रचनाओं से पिछले चार-पाँच साल पहले ही अवगत हुए थे। उनकी लघुकथाएँ सटीक और तीक्ष्ण प्रहार करती हैं । उनके २ - ३ लंबी कहानियाँ भी पढ़ने को मिली थी तो मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि चेखव के पुराने कहानियाँ पढ़ रही हूँ । किसी भी लेखक या रचनाकार की रचना पाठक को अपने जीवन से जुड़े होने की महसूस करें तो सार्थक होता है लेखन। मुझे उनकी प्रेम कविताएँ अनुवाद करते हुए यह कई बार अनुभव हुआ है । “ जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि “उक्ति को उन्होंने चिरतार्थ किया है । सिर्फ लेखन ही नहीं उन्होंने विदेशी भाषा के साहित्य का भी हिंदी अनुवाद किया है । उनको हिंदी प्रेमी, संरक्षक और संवाहक बोले तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । सकारात्मक विचार और अपने आप पर विश्वास रखने को बढ़ावा देने वाले क़लमकार को अनंत शुभकामनाएँ । मित्रा शर्मा
Indu kant Angiras has been studying Hungarian for the last twenty years. He also has had longer and shorter fellowships in Hungary to study language and literature. His main motivation was his interest in poetry, prose and tales and he contributed many valuable translations of Hungarian prose, plays and poems from the Hungarian original by Sándor Petőfi, János Arany, Endre Ady, Béla Balázs, Margit Kaffka, Attila József, Sándor Tar and others.
श्री इन्दुकांत आंगिरस जी वरिष्ठ कवि, कथाकार ही नहीं कई विदेशी भाषाओं के जानकार भी हैं। मेरी उनसे मुलाकात "सनद पटल" पर कविता प्रस्तुति के माध्यम से हुई । धीरे-धीरे जाना कि उन्होंने कई हिन्दी किताबों का ग्रीक, हंगरियन भाषा में अनुवाद किया है । इसके उलट दूसरी भाषा की किताबों का हिंदी भाषा में भी अनुवाद किया है। वे बातचीत में बहुत सहज,सरल व स्वाभाविक रूप से कला, संस्कृति से प्रेम करते हैं। वे अक्सर अन्य कवियों की कविता, गीत, ग़ज़ल , लघुकथा, कहानी के साथ पेश होते हैं। उनकी वर्णन शैली अद्भुत है।इस तरह इन्दुकांत जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं।मैं ऐसे साहित्य साधक को नमन करता हूँ और उनके दीर्घायु होने की कामना करता हूँ। -अरविंद मिश्र (कवि,लेखक व्यंग्यकार),भोपाल (म.प्र.)
एक कवि, एक शायर और बेमिसाल शख़्सियत के मालिक हैं "इन्दुकांत आंगिरस जी". मैं व्यक्तिगत रूप से उनसे कभी नहीं मिली हूँ लेकिन हाँ, एक दो बार फोन पर उनसे बात ज़रूर हुई है । इन्दुकांत जी कवि, लेखक व साहित्यकारों के नि:शुल्क साक्षात्कार लेते हैं और उनको एक नई पहचान देते हैं.मैने ऐसे ही एक महिला लेखिका, कवयित्री व साहित्यकार का इंटरव्यू देखा था तब मैं इंदुकांत जी से बहुत प्रभावित हुई थी। ऐसे ही एक चैनल के माध्यम से मेरी आवाज़ उन तक पहुँची थी तब उन्होनें मेरी आवाज़ की न केवल प्रशंसा की थी बल्कि मेरा उत्साह/ हौंसला भी बढाया थ। फिर एक दो बार कार्यक्रमों के माध्यम से उनसे बात- चीत का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी कायम है। एक अच्छी सोच रखने वाले इन्दुकांत आंगिरस जी के बारे में मैं केवल इतना ही कहना चाहुँगी कि..... बिना कहे कुछ भी वो सब समझ जाते हैं, मदद के लिए सभी की हाज़िर वो हो जाते हैं. एक बार कोई मिल ले उनसे अगर, चेहरो को याद हमेशा वो रख जाते हैं. आशाओं से भर देते हैं मिलने वालों/दोस्तों को, मार्गदर्शन वो फिर सबका कर जाते हैं. मांगते नहीं कुछ किसी से भी पर, अपनी दुआएँ वो सबको दे जाते हैं. शुक्रिया धन्यवाद आभार शाहाना परवीन 'शान' मुज़्ज़फ़्फ़रनगर - उत्तर प्रदेश
श्री इन्दुकांत आंगिरस से मैं करीब चालीस वर्षों से परिचित हूँ , परिचित ही क्यूँ , निरंतर उनका सहयात्री बन कर साहित्यिक यात्रा करता चला आ रहा हूँ। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आप ने गीत , ग़ज़ल , मुक्तक , लघुकथा , कविता , हाइकु , दोहे जैसी विधाओं में सफलतापूर्वक लेखन किया है। आपने " शहर और जंगल " , " प्रेम -प्रसंग " और " फ़्लैश बैक " जैसे उत्कृष्ट काव्य संग्रहों का सृजन किया है। आपने अँगरेज़ी एवं हंगेरियन भाषा से कुशल अनुवाद किया है। आपने यूट्यूब पर अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों का साक्षात्कार भी लिया है। नए युवा कवियों को साथ लेकर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का कार्य करते रहे हैं। आपकी दीर्घायु एवं साहित्य जगत में उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि कोटि शुभकामनाएँ। - शिवनलाल जलाली - दिल्ली
Shri Indukant Angiras,the founder of Sanad Foundation is a man with so many qualities. He is a writer himself but he takes so much initiative to promote others. I can say that because he is always there to help me getting promotions in singing and writing. A big clapping for the great man with a loving heart. God helps those who help others. Alka Soi : Daughter of Devendr Satyarthi , Delhi
इन्दुकांत आंगिरस एक मस्त मौला इंसान हैं । उन अज़ीज़ दोस्तों में से हैं जिन्हें गर हम भूलना भी चाहें तो नहीं भूल सकते हैं। शेरो शायरी के शौकीन और एक अलग व्यक्तित्व के मालिक , बहुत ही ख़ूबसूरत अंदाज़ और उनके पढ़ने का तौर तरीका। मस्त मौला इन्दुकांत के चेहरे पर हमने कभी मायूसी नहीं देखी और न उनकी ज़ेब में कंजूसी। हर हाल में मस्त रहने वाले फक्कड़। हमने इनके साथ मिलकर सबसे पहले" कारवाँ " को खोला ,बाद में इनके ही मदद से हमने " कलश कारवाँ फाऊंडेशन ", बेंगलूरु संस्था की स्थापना की ,जिसमें इन्दुकांत जी का योगदान अभूतपूर्ण रहा। हमें याद आ रहा है इनकी जीप जो पूरे बंगलोर में अकेली थी ,जिस पर हमलोग बैठकर अक्सर घूमने निकल जाया करते थे, बंगलोर का शायद ही कोई कोना होगा , जहाँ हम लोग नहीं घूमने गए होगे। हक़ीक़त तो ये है कि आज राही जिस मुकाम को हासिल किया है उसमें इंदुकांत अंगिरस का जबरदस्त हाथ है, चाहे वह किसी प्रकार का हो ; तन, मन और धन तीनों से इंदुकांत अंगिरस ने हमें सहायता की है । उनके साथ मेरी अनेक यादें जुडी हैं। इंदुकांत की जितनी तारीफ़ हम करें,कम ही होगा ,क्योंकि सर से पांव तक इनमें तारीफ ही तारीफ हमें दिख रही । ईश्वर इन्हें दीर्घायु रखें,यही कामना करता हूँ। राही राज़, बेंगलुरु
आदरणीय साहित्यकार, अनुवादक, सम्पादक एवं संस्कृतिसेवी श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी के बारे में कुछ शब्द कहना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और सम्मान का विषय है। मैं नेपाल की निवासी हूँ और साहित्य के माध्यम से अनेक भारतीय साहित्यकारों से परिचित होने का अवसर मिला है। उन्हीं में एक अत्यंत आत्मीय, विनम्र और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं – श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी। मुझे व्यक्तिगत रूप से उनकी एक विशेषता अत्यंत प्रभावित करती है—वे नए और उभरते हुए लेखकों को खोजते हैं, उन्हें मंच प्रदान करते हैं और निरंतर प्रोत्साहित करते हैं। ‘परिचय साहित्य परिषद्’ और ‘सनद फाउंडेशन’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से वे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। संपादक, आयोजक, अनुवादक और साहित्यकार के रूप में उनकी बहुआयामी भूमिका साहित्य-जगत के लिए अत्यंत मूल्यवान है। नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और साहित्यिक संबंध रहा है। रसिक जी जैसे साहित्यकार इस संबंध को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं। मैं उनके प्रति अपनी हार्दिक श्रद्धा, सम्मान और शुभकामनाएँ व्यक्त करती हूँ। उनके स्वस्थ, सक्रिय और सृजनशील जीवन तथा आने वाले वर्षों में भी साहित्य, भाषा और संस्कृति की सेवा इसी समर्पण के साथ करते रहें। सादर - कल्पना पौडेल “जिज्ञासु” नेपाल
Indu Kant Angirassal 2023-ban ismerkedtem meg. Naukuchiatalban az Utsah Toli kommunikációs kulturális centrumban indiai gyerekekkel magyar népmesét illusztráltunk. Ehhez nyújtott segítséget egy nagyszerű ember, barát Indu. Magyar népmeséket fordított hindire. Nagyon izgalmas feladat volt, hogyan értelmezik más kultúra mesevilágát az indiai gyerekek. Ekkor született az ötlet, hogy ez jelenjen meg könyv formájában is. Később segítséget nyújtott a Magyarországon működő: Igazgyöngy Alapítvány, Berettyóújfaluból. Ez az iskola 1999 ben alakult a gyerekszegénység felszámolásáért dolgozik. (Hasonló képen működik, mint az indiai Utsah Toli) Ezek a nehéz sorsú gyerekek készítették ezeket a csodálatos festményeket, a mese illusztrálásához. Köszönet érte! Köszönet Indu Kant Angirasnak a könyv megálmodójának. Gajdán Zsuzsa festőművész, Magyarország
A very courteous man, a lifelong learner, a socially conscious and versatile poet, a polyglot, an inspiring mentor, always ready to help, and a wonderful friend—this is all I can recall at the moment, though there is so much more that words cannot fully capture. He inspires me through his experiences, his poetry, his ideas, and his aspirations. Every conversation with him leaves me with something new to think about and learn. I genuinely enjoy his company and feel fortunate to have his guidance and friendship. I am truly grateful for this warm and enriching intergenerational friendship. It is a privilege to know him, and I hope to continue learning from him for many years to come. Misha Sindhu - Delhi, Kalaripayattu Expert, Gold Medalist.
लब्ध प्रतिष्ठ कवि और शायर इंदुकांत आंगिरस की सशक्त रचनाधर्मिता है और आज आप किसी परिचय को मोहताज नहीं हैं। आंगिरस जी, परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली / सनद - ΣΑΝΑΔ फाउंडेशन – दिल्ली के संस्थापक हैं। सनद पटल सक्रिय है और अब तक अनेक साहित्य मनीषियों के साथ आप संवद स्थापित कर चुके हैं। आंगिरस जी का व्यापक फलक है और विषय विविधता के दृष्टिकोण से भी आप आकाश के विस्तार को अपने दामन में समेटे हुए हैं। सृजनशीलता से सम्बद्ध विचार और कला पक्ष का सम्यक निर्वाह हुआ है। बड़ी अच्छी बात है कि आप विचार के अनुकूल, परिवेश, पात्रों, घटनाओं और परिस्थितियों की कल्पना कर लेते हैं और सही से संदर्भित भी करते हैं। ऐसी खासियत के चलते ही बड़ी অচ্ছী-অচ্ছী কবিতা এবং গাজলের মধ্যেও হয়েছে। এইসব রচনার সামাজিক যথার্থতা এবং আত্মানুভূতির প্রতিবিম্বনও হয়েছে। আপনি পাঠকদের রুচি, কল্পনা এবং চিন্তাভঙ্গির উন্নয়নের জন্যও असाधारণভাবেই । प्रमोद झा - मुरादाबाद
इन्दुकांत आंगिरस साहित्य के अध्येता तो हैं ही साहित्य के अच्छे रचनाकार भी हैं।उनके साहित्यिक कार्यों का विस्तार विदेश की कठिन भाषा से हिंदी में सरल अनुवाद प्रस्तुत करने की भी है और दूसरी ओर देश के विभिन्न प्रतिभाओं को आगे लाने में भी उनकी सराहनीय भूमिका रही है। व्यक्ति के रूप में इंदुकांत आंगिरस जी से मैं बहुत प्रभावित रहा हूँ।उन्होंने पुस्तकों का प्रकाशन किया है और हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में भी अपना योगदान दिया है।इन्दुकांत आंगिरस दिल्ली और बेंगलुरु के बीच यानी कि उत्तर और दक्षिण के बीच एक समन्वय बिंदु के रूप में हमें दृष्टिगत होते हैं।उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगल कामना। @ईश्वर करुण, महासचिव,तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी,चेन्नै-26 ईमेल ishwarkarunchennai@gmail.com
इन्दुकांत आंगिरस जी के व्यक्तित्व में बहुसांस्कृतिक सहज तत्व देखे जा सकते हैं। सर्वाधिक रोचक जो तत्व इनमें मुझे आकर्षित करता है वह है इनकी बोल-चाल में, हाव-भाव में रची-बसी मिर्ज़ा ग़ालिब वाली दिल्ली की सादगी और सुगन्ध। अपनी बात को सरल मन से प्रस्तुत करते हैं। प्रायः कुछ न कुछ नया करने की वृत्ति इन्हें असाधारण बनाती है। मेरे पसन्दीदा व्यक्ति हैं। अच्छे मित्र हैं। डॉ.विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' गुरुग्राम , हरियाणा
एक साहित्यिक नाम : इन्दुकांत आंगिरस इन्दुकांत आंगिरस जी जैसे सहयोगी मित्र के लिए शब्द केवल धन्यवाद नहीं, सम्मान और आत्मीयता से निकलने चाहिए। कुछ लोग जीवन में यूँ ही नही आते,वे हमारी यात्रा के सहयात्री बन जाते हैं।मेरी साहित्यिक यात्रा में इन्दुकांत आंगिरस जी का स्थान भी कुछ ऐसा ही है।जब शब्दों को दिशा की आवश्यकता हुई,उन्होंने मार्गदर्शन दिया; जब क़दमों में संकोच आया, उन्होंने विश्वास जगाया;और जब मेरी रचनात्मक यात्रा में कोई कठिन मोड़ आया, उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के मेरा साथ दिया। साहित्य की राह आसान नहीं होती,यहाँ प्रशंसा से अधिक आवश्यक होता है सच्चा सहयोग, सही सलाह और हौसला देने वाला एक अपना। इन्दुकांत जी ने मुझे ये तीनों चीजें हमेशा दीं। उनका सहयोग मेरे लिए केवल सहायता नहीं, बल्कि मेरी साहित्यिक यात्रा को बल मिला। एक विश्वासपूर्ण अच्छे इन्सान जिसने मुझे आगे बढ़ने का साहस दिया। इन्दुकांत जी, आपका आभार शब्दों में बाँधना कठिन है, बस इतना कहूँगी मेरी साहित्यिक यात्रा के पन्नों में आपका नाम सदैव सम्मान और आत्मीयता से लिखा रहेगा। प्रीति राही कवयित्री / लेखिका
भाई इंदुकांत आंगिरस जी से मेरी दोस्ती चार दशक से भी ज़्यादा पुरानी है। बंधुवर अनिल 'मीत' के माध्यम से 'परिचय' की नई दिल्ली स्थित रशियन कल्चरल सेंटर में आयोजित एक गोष्ठी में इनसे परिचय हुआ। हमारे दो शौक़ सांझे निकले - एक तो कविता - शायरी और दूसरा फोटोग्राफी। इस कारण यह परिचय मित्रता का रूप ले बैठा। इनकी खनकती हुई आवाज़ में कविताएं सुनना अपने आप में ही आनंददायक है। कविताओं का विषय - वैविध्य और समसामयिक समस्याओं को उजागर करने का इनका अंदाज़, इनकी भाषा शैली सुधी पाठकों के मन को छू जाती है। इसके साथ -साथ सोशल - मीडिया प्लेटफॉर्मों के द्वारा भी इंदु भाई साहित्य- सेवा कर रहे हैं - समकालीन क़लमकारों को एक मंच पर साथ लाने का इनका अनवरत प्रयास सराहनीय है। इनकी ऊर्जा बनी रहे और एक दीर्घावधि तक इनकी साहित्य-साधना निर्बाध चलती रहे, ईश्वर से यही प्रार्थना है🙏 सुभाष प्रेमी वरिष्ठ साहित्यकार फरीदाबाद , हरियाणा।
आदरणीय इन्दुकान्त आंगिरस : साहित्य, संस्कृति और भाषा के देदीप्यमान हस्ताक्षर आधुनिक हिंदी और भारतीय साहित्य के आकाश में श्री इन्दुकान्त आंगिरस एक ऐसी विरल साहित्यिक चेतना हैं, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सारस्वत साधना को नए आयाम दिए हैं। वे एक निष्प्रभ लकीर के फकीर न होकर एक युगांतरकारी लेखक, कालजयी कवि, प्रखर संपादक, सूक्ष्मदृष्टि कहानिकार और सिद्धहस्त अनुवादक हैं।शब्दों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने वाले, साहित्यिक शुचिता और बौद्धिक श्रेष्ठता का अनूठा संगम हैंl समृद्ध भाषाओं के अगाध ज्ञाता। इन्दुकान्त आंगिरस जी का भाषाई समन्वय उनकी रचनाओं में साफ झलकता है। उनकी लेखनी किसी एक विधा की दासी नहीं, बल्कि उन्होंने काव्य और गद्य दोनों ही क्षेत्रों में अनेकों उत्कृष्ट पुस्तकों की रचना करके मां भारती के भंडार को समृद्ध किया है। एक संपादक के रूप में जहां उन्होंने साहित्यिक मानदंडों को परिष्कृत किया, वहीं एक अनुवादक के तौर पर विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं के सेतु बने हैं। आप समकालीन साहित्य के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं जो बहुआयामी सृजनशीलता के जीवंत प्रतीक हैं l उनकी पुस्तकों की सुदीर्घ श्रृंखला इस बात का प्रमाण है कि वे निरंतर माँ सरस्वती की अनवरत साधना में लीन हैं l अंत में यदि मैं ये लिखूँ कि जहां गद्य की गंभीरता और काव्य की तरलता एक साथ आकर मिलती है उस संगम स्थल का नाम है श्री इंदुकांत अंगिरस तो अतिश्योक्ति नहीं होगी l डॉ. नीता रानी नॉएडा , उत्तर प्रदेश
2007 में बेटे बहू के पास बंगलुरु आते जाते रहने और वहाँ की साहित्यिक संस्था 'साहित्य साधक मंच' के कार्यक्रमों में जाने के कारण भाई इंदुकांत से परिचय हुआ जो आज भी कायम है । इस दौरान मैनें पाया कि वे निहायत ही सरल, सीधे और विनम्र इंसान हैं जो किसी का दिल नहीं दुखा सकते । कभी भी अपने बारे में बड़ी बातें नहीं करते और सदैव सक्रिय रहते हैं । Ramesh Joshi Chief editor - VISHWA International Hindi Magazine
कवि • साहित्यकार • अनुवादक संस्थापक-अध्यक्ष, सनद फाउंडेशन : श्री इन्दुकांत आंगिरस से मेरा परिचय उनके बचपन के दिनों से है। बचपन से ही उनमें हिंदी भाषा और कविता के प्रति गहरा अनुराग और शब्दों के प्रति असाधारण संवेदनशीलता दिखाई देती थी।कम उम्र में ही वे कविताएँ लिखने लगे थे और उनमें सहज काव्य-बोध तथा कल्पनाशीलता स्पष्ट दिखाई देती थी।समय के साथ यही बाल-सुलभ रुचि एक गंभीर और निरंतर साहित्य-साधना में विकसित हुई।उनकी रचनात्मकता का संसार मानवीय संवेदनाओं, प्रकृति, स्मृतियों, जीवन की विडंबनाओं और सामाजिक सरोकारों से समृद्ध है। उनके कविता-संग्रह ‘शहर और जंगल’ में उनकी विशिष्ट काव्य-दृष्टि के विविध आयाम दिखाई देते हैं।उनकी साहित्यिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका अनुवाद-कर्म भी है, विशेषकर हंगेरियन साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुँचाने का उनका प्रयास।उनके लिए अनुवाद केवल भाषा-परिवर्तन नहीं, बल्कि भाव, संस्कृति और संवेदना के बीच एक सेतु का निर्माण है।कविता, कहानी और अनुवाद के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उनकी बहुआयामी प्रतिभा को दर्शाती है।साहित्य उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज को समझने तथा अधिक संवेदनशील बनाने का माध्यम है। इसी साहित्यिक प्रतिबद्धता का विस्तार सनद फाउंडेशन के माध्यम से उनके कार्यों में दिखाई देता है।बचपन में शब्दों से शुरू हुई उनकी यात्रा आज एक परिपक्व और विशिष्ट साहित्यिक पहचान का रूप ले चुकी है।उनकी कलम संवेदना, विचार और सौंदर्य को अभिव्यक्ति देती हुई हिंदी साहित्य को निरंतर समृद्ध कर रही है। इन्दुकांत आंगिरस जी की साहित्य-साधना उस विश्वास की यात्रा है कि शब्द केवल लिखे नहीं जाते—वे जिए जाते हैं, महसूस किए जाते हैं और फिर पाठक के हृदय तक पहुँचते हैं। भारती पालीवाल , वसंत विहार , नई दिल्ली
श्री इंदुकांत आंगरिस मेरे 25-26 पुराने अन्यतम मित्र हैं। आपके सौजन्य से मेरे पहले उपन्यास मशाल जलती रहे का लोकार्पण रशियन कल्चर सेंटर,नई दिल्ली सभागार में हुआ था।आप पूरी तरह साहित्य के लिए समर्पित हैं। कविता, कहानी और अनुवाद में आपको प्रवीणता प्राप्त है। विदेशी भाषा विशेष रूप से हंगेरियन भाषा के साहित्य को भारत में लोकप्रिय बनाने का आपको श्रेय प्राप्त है। आकाशवाणी से सेवानिवृत्ति के उपरांत जब मैंने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से संबद्ध राष्ट्रीय संस्था नागरी लिपि परिषद, राजघाट नई दिल्ली के महामंत्री पद का दायित्व मैंने संभाला।इंदुकात जी ने नागरी लिपि परिषद द्वारा समय समय पर आयोजित बहुभाषी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। जब भी आवश्यकता पड़ी, इन्होंने इन काव्य गोष्ठियों का संयोजन और संचालन भी किया। शुद्ध साहित्यिक कविताएं लिखना इनको भाता है।यही कारण है कि यह साहित्य के किसी गुट से परे रहकर एकांत भाव से साहित्य सृजना कर रहे हैं। मूल श्री इंदुकांत आंगरिस मेरे 25-26 पुराने अन्यतम मित्र हैं। आपके सौजन्य से मेरे पहले उपन्यास मशाल जलती रहे का लोकार्पण रशियन कल्चर सेंटर,नई दिल्ली सभागार में हुआ था।आप पूरी तरह साहित्य के लिए समर्पित हैं। कविता, कहानी और अनुवाद में आपको प्रवीणता प्राप्त है। विदेशी भाषा विशेष रूप से हंगेरियन भाषा के साहित्य को भारत में लोकप्रिय बनाने का आपको श्रेय प्राप्त है। आकाशवाणी से सेवानिवृत्ति के उपरांत जब मैंने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से संबद्ध राष्ट्रीय संस्था नागरी लिपि परिषद, राजघाट नई दिल्ली के महामंत्री पद का दायित्व मैंने संभाला।इंदुकात जी ने नागरी लिपि परिषद द्वारा समय समय पर आयोजित बहुभाषी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। जब भी आवश्यकता पड़ी, इन्होंने इन काव्य गोष्ठियों का संयोजन और संचालन भी किया। शुद्ध साहित्यिक कविताएं लिखना इनको भाता है।यही कारण है कि यह साहित्य के किसी गुट से परे रहकर एकांत भाव से साहित्य सृजना कर रहे हैं। मूल दिल्ली के वासी होने के नाते आपके व्यक्तित्व में सहजता और सरलता समाहित है। मैं इनके सुखी, स्वास्थ्यप्रद और समृद्ध जीवन की कामना करता हूं। डॉ हरिसिंह पाल महामंत्री - नागरी लिपि परिषद, राजघाट, नई दिल्ली संपादक - न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका सौरभ
दिल्ली में जन्मे इन्दुकांत आंगिरस 'रसिक देहलवी' हिंदी साहित्य और अनुवाद जगत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बहुआयामी हस्ताक्षर हैं। बहुभाषी प्रतिभा के धनी श्री आंगिरस हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू के साथ-साथ हंगेरियन, ग्रीक, चेख और लिथुआनिअन जैसी दुर्लभ यूरोपीय भाषाओं पर भी असाधारण पकड़ रखते हैं। 'परिचय साहित्य परिषद्' और 'सनद (ΣΑΝΑΔ) फाउंडेशन' के संस्थापक के रूप में वे साहित्य और समाज की निरंतर सेवा कर रहे हैं। उनके कई एकल कविता संग्रह (जैसे 'शहर और जंगल', 'गजरे') और अनूदित कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, और वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन व अनुवाद में पूरी निष्ठा से संलग्न हैं। उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक विशेषता विश्व साहित्य को हिंदी के करीब लाना है। उन्होंने हंगेरियन लोककथाओं ('तीन वरदान'), अरबी कविताओं और शांदोर पैतोफ़ी की रचनाओं का हिंदी में उत्कृष्ट अनुवाद करके भारतीय पाठकों के लिए वैश्विक साहित्य के द्वार खोले हैं। - संतोष संप्रीति , दिल्ली .
मैं ऐसा समझता हूँ कि मौजूदा जीवन शैली ने हमारी साहित्यिक सक्रियता को एक हद तक कम कर दिया है।हम लोग ज़माने के साथ आगे तो बढ़ रहे हैं मगर साहित्य और उसके मर्म से दूर होते जा रहे हैं।ऐसे नासाज़गार हालात में भी इन्दुकांत आंगिरस उर्फ़ रसिक देहलवी अपनी पुरअसर आवाज़ के माध्यम से मुख्तलिफ़ शायरों के कलाम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचा कर शेरो-अदब की बेलौस ख़िदमत अंजाम दे रहे हैं।मेरी ग़ज़लों को भी इन्होंने अपनी आवाज़ देकर पेश किया है।इनका ये मुनफ़रिद काम वाकई क़ाबिले तारीफ़ है ।आइंदा भी ये अपने काम को इसी जोशो खराश के साथ अंजाम देते रहेंगे। ख़ैर तलब - शकूर अनवर