About

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My Mission

Eradicate illiteracy with the lamps of letters.

Books are the passages to knowledge and Libraries, the house of books are the temples of knowledge.

A house without books is a temple without God.

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Technology

Technology can change the world but it is controlled by MAN.

Web Design

Design is like make up which attracts everyone.

Branding

Branding makes You unique in Crowd.

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Why Us

We feel the pulse of Creators

Every creation is an ART and Art should reach everyone as it can transform people.

Each step towards destination is as important as our garden flower which needs mud , water and Sunlight to blossom.

Interviews
Reviews
Projects

Personal Interests

My Hobbies

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Philately

Since childhood, I have had a passion for collecting stamps. I used to keep postage stamps in a stamp album. Over time, I stopped collecting stamps actively, but I still collect them whenever possible. This hobby gives me joy and enriches my knowledge.

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Numismatics

Since childhood, I enjoyed collecting coins and keeping them in a gullak. I could not develop this hobby professionally, but I still have a good collection of Indian and international coins and notes.

♟️

Chess

I learnt chess at the age of 6. First, I learnt national chess and then international chess. I played with friends and colleagues, but never as a professional player. I still enjoy playing chess.

🎯

Carrom

Carrom has been my favourite game since childhood. It is always fun to play. I played with friends and colleagues, but never as a professional player.

🎱

Billiards / Snooker

I learnt this game at the age of 20. I played at Connaught Place, Vasant Vihar Club, Hinduja Club, and Surat Club. I still enjoy playing this wonderful game.

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Music

Music has always been a meaningful part of life. It brings peace, creativity, rhythm, and emotional connection. Listening to music and engaging with melodies gives joy and inspiration.

Community of Creators

Testimonials

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Pramod Sharma Asar

वरिष्ठ ग़ज़लकार

“ श्री इंदुकांत अंगिरस एक जाने-माने शाइर होने के अलावा साहित्य की अन्य विधाओं में भी ख़ासा दखल रखते हैं। उनकी कविताएँ, दोहे, लेख भी समय समय पर साहित्यिक दुनिया की नज़रों से गुज़रे हैं और जिसके लिए उन्होंने भरपूर दाद पाई है। मैं यहाँ यह भी साझा करना चाहूँगा कि हिन्दी, उर्दू के अलावा इंदुकांत जी की अंग्रेजी, हंगेरियन जैसी विदेशी भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ है। कई विदेशी भाषाओं की कविताओं का इन्होंने हिन्दी में अनुवाद किया है जिसे साहित्यिक जगत में बहुत सराहा गया है। मुझे याद पड़ता है कि एक मशहूर लिथुआनियाई चित्रकार की बनाई हुई तस्वीरों पर उन्होंने हिन्दी में कविताएं लिखी और इन कविताओं को एक किताब का रूप दिया जो एक विलक्षण प्रयोग है और बहुत पसंद किया गया है। इसके अलावा इंदुकांत जी नियमित तौर पर यू-टयूब पर 'सात-सुर' के नाम से इंतख़ाबी अशआर पोस्ट करते हैं जिसमें हिंदुस्तान के नामचीन, मशहूर-ओ-मारूफ़ शाइरोंंके अलावा नए और गुमनाम शाइरों के अशआर होते हैं। धीरे-धीरे ये भी शाइरी पसंद लोगों में एक मुकाम हासिल करता जा रहा है। अंत में यह कह कर अपनी बात को विराम दूँगा कि प्रभु भाई इंदुकांत अंगिरस को अच्छा स्वास्थ्य और लम्बी उम्र दें ताकि ये लम्बे समय तक साहित्य की इसी प्रकार सेवा करते रहें। ”

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Ram Awadh Vishwakarma

वरिष्ठ साहित्यकार

सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी इन्दुकान्त जी न केवल भारत बल्कि विदेश में भी एक प्रतिष्ठित साहित्यकार के रूप में अपने को स्थापित कर चुके हैं। वे हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू , बाँग्ला, हंगरी आदि कई देशी विदेशी भाषाओं के ज्ञाता हैं। जीवन का महत्वपूर्ण भाग विदेश में गुज़ार चुके इन्दुकान्त जी मुक्तक, हाइकु, लघुकथायें आदि लिखकर साहित्य की निरन्तर सेवा कर रहे हैं। उनके लेखन में चुटीलापन है यही कारण है कि प्रकाशन की दुनिया में उनके साहित्य की माँग निरन्तर बनी हुई है। उनके पिता श्री और दादा श्री संस्कृत और हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वान थे तभी तो विद्वता उन्हें विरासत में प्राप्त हुई है। आप देश के.लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों का साक्षात्कार यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण करते हैं। आप सहज एवं सरल स्वभाव के धनी हैं जिसके कारण लोग आपकी तरफ नि:शंकोच आकर्षित होकर आपके मित्र बन जाते हैं। आप में निरन्तर कुछ नया सीखने और नया करने का विशेष गुण है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। राम अवध विश्वकर्मा ग्वालियर

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Neelima Mathur

Managing Trustee: Foremedia

It has been a pleasure to be professionally associated with Indu Kant Angiras. A writer and poet in his own right, Indu Kant has a keen understanding of the Hungarian language. He provided very appropriate and sensitive translations of articles / interviews conducted with Zsuzsa Gajdan. She is a well-known artist in Hungary, who visited and conducted an art workshop at our project with children, Utsah Toli, in Naukuchiatal, Dist. Nainital, Uttarakhand, India. We wish Indu Kant the very best in his creative endeavours ahead.

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Dr.Rishabhdev Sharma

वरिष्ठ साहित्यकार

इन्दुकांत आंगिरस को मैं एक ऐसे बहुमुखी प्रतिभाशाली साहित्यकार के रूप में जानता हूँ, जो जाने कितने वर्षों से लगभग प्रतिदिन कुछ न कुछ नया रचते ही हैं। काग़ज़ पर, स्क्रीन पर, या आभासी तरंगों पर। वे अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से साहित्य, कला, समाज और संस्कृति के तमाम सवालों से मुठभेड़ करने में दक्ष है। सरल सहज पारदर्शी व्यक्तित्व के धनी कवि-कथाकार आंगिरस को अनुवाद के माध्यम से कई देशी-विदेशी भाषा-समाजों के बीच साहित्यिक-सांस्कृतिक सेतु निर्मित करने का भी श्रेय प्राप्त है। उनका स्नेहभाजन होने के नाते मैं स्वयं को भाग्यशाली मानता हूँ। स्वस्ति!

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Naresh Shandilya

वरिष्ठ साहित्यकार

इंदुकान्त आंगिरस बहुआयामी प्रतिभा के धनी एक अच्छे कवि हैं। उनकी अनेक पुस्तकें मेरे पास हैं। अधिकांशतः छंद मुक्त विचार कविताएँ लिखते हैं। उनकी प्रेम कविताएँ तो अद्भुत हैं। अनुभव पगी हैं और प्रेम के इंद्रधनुषी रंगों से सजी हैं। गज़लों में भी उनका अपना अंदाज़ है। अपने ही रंग और मिज़ाज की उनकी ग़ज़लों ने मुझे ख़ूब प्रभावित किया है। एक अच्छी और महत्वपूर्ण बात ये है कि वे अपनी हर रचना में स्वयं भी मौजूद लगते हैं। रचना में रचनाकार की मौजूदगी रचना को बड़ा और मौलिक बना देती है। उनकी अनेक रचनाओं का हंगेरियन भाषा में भी अनुवाद हो चुका है। वे जितने अच्छे रचनाकार हैं उतने ही नेक इंसान भी हैं। यारों के यार हैं। उनके प्रियदर्शी व्यक्तित्व पर स्मित मुस्कान आकर्षक लगती है। - नरेश शांडिल्य : कवि, नाट्यकर्मी, संपादक, समीक्षक

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Dr Savita Chadha

वरिष्ठ साहित्यकार

इन्दुकांत आंगिरस को मैं बहुत पहले से जानती हूँ , तब से जानती हूँ जब से उन्होंने लिखना प्रारंभ किया और प्रारंभिक लेखन ही उनका इतना प्रभावी था कि मैंने उनकी लिखी कविता की चंद पंक्तियो को अपनी एक कहानी में उदृत किया था " बोएंगे बबूल तो कैसे उगेंगे गुलाब / किसी ने भी कहीं हो बात ग़लत है जनाब/ ईश्वर को देखिये , ख़ुदा को देखिये / फसल इंसान की बो रहा है और पैदा दरिंदा हो रहा है ।" इन्दुकांत जी की ये पंक्तियाँ मैंने 1988 में अपने प्रकाशित कहानी संग्रह "एक और भगवान" में शामिल की थी और तब से अब तक मैं इनकी कई रचनाएँ पढ़ चुकी हूं। आपका सार्थक सृजन समाज को प्रकाशित करता है, प्रोत्साहित करता है । जहाँ आपका साहित्यिक सफ़र अनुकरणीय है, वहीं समाज में आपकी सोच भी सराहनीय है। आप नई वेबसाइट शुरू करने जा रहे हैं मुझे आशा है आपको अपार सफलता मिलेगी, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ । हरियाणा गौरव डॉ सविता चड्ढा

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Mitra Sharma

कवयित्री

"जीवन में कामयाब होना है तो अपनी अंदर की शक्ति को जगाना होगा .. आप का व्यक्तित्व बताता है कि आप कितना लगनशील और जानने के लिए कितना कोशिश करते हैं " यह कथन है आदरणीय इंदुकांत अंगिरस जी का।ऊँचे व्यक्तित्व के धनी इंदुकांत अंगिरस जी के रचनाओं से पिछले चार-पाँच साल पहले ही अवगत हुए थे। उनकी लघुकथाएँ सटीक और तीक्ष्ण प्रहार करती हैं । उनके २ - ३ लंबी कहानियाँ भी पढ़ने को मिली थी तो मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि चेखव के पुराने कहानियाँ पढ़ रही हूँ । किसी भी लेखक या रचनाकार की रचना पाठक को अपने जीवन से जुड़े होने की महसूस करें तो सार्थक होता है लेखन। मुझे उनकी प्रेम कविताएँ अनुवाद करते हुए यह कई बार अनुभव हुआ है । “ जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि “उक्ति को उन्होंने चिरतार्थ किया है । सिर्फ लेखन ही नहीं उन्होंने विदेशी भाषा के साहित्य का भी हिंदी अनुवाद किया है । उनको हिंदी प्रेमी, संरक्षक और संवाहक बोले तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । सकारात्मक विचार और अपने आप पर विश्वास रखने को बढ़ावा देने वाले क़लमकार को अनंत शुभकामनाएँ । मित्रा शर्मा

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Dr Köves Margit

Professor, Delhi University

Indu kant Angiras has been studying Hungarian for the last twenty years. He also has had longer and shorter fellowships in Hungary to study language and literature. His main motivation was his interest in poetry, prose and tales and he contributed many valuable translations of Hungarian prose, plays and poems from the Hungarian original by Sándor Petőfi, János Arany, Endre Ady, Béla Balázs, Margit Kaffka, Attila József, Sándor Tar and others.

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Dr Arvind Mishra

वरिष्ठ साहित्यकार

श्री इन्दुकांत आंगिरस जी वरिष्ठ कवि, कथाकार ही नहीं कई विदेशी भाषाओं के जानकार भी हैं। मेरी उनसे मुलाकात "सनद पटल" पर कविता प्रस्तुति के माध्यम से हुई । धीरे-धीरे जाना कि उन्होंने कई हिन्दी किताबों का ग्रीक, हंगरियन भाषा में अनुवाद किया है । इसके उलट दूसरी भाषा की किताबों का हिंदी भाषा में भी अनुवाद किया है। वे बातचीत में बहुत सहज,सरल व स्वाभाविक रूप से कला, संस्कृति से प्रेम करते हैं। वे अक्सर अन्य कवियों की कविता, गीत, ग़ज़ल , लघुकथा, कहानी के साथ पेश होते हैं। उनकी वर्णन शैली अद्भुत है।इस तरह इन्दुकांत जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं।मैं ऐसे साहित्य साधक को नमन करता हूँ और उनके दीर्घायु होने की कामना करता हूँ। -अरविंद मिश्र (कवि,लेखक व्यंग्यकार),भोपाल (म.प्र.)

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शिवनलाल जलाली

वरिष्ठ साहित्यकार

श्री इन्दुकांत आंगिरस से मैं करीब चालीस वर्षों से परिचित हूँ , परिचित ही क्यूँ , निरंतर उनका सहयात्री बन कर साहित्यिक यात्रा करता चला आ रहा हूँ। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आप ने गीत , ग़ज़ल , मुक्तक , लघुकथा , कविता , हाइकु , दोहे जैसी विधाओं में सफलतापूर्वक लेखन किया है। आपने " शहर और जंगल " , " प्रेम -प्रसंग " और " फ़्लैश बैक " जैसे उत्कृष्ट काव्य संग्रहों का सृजन किया है। आपने अँगरेज़ी एवं हंगेरियन भाषा से कुशल अनुवाद किया है। आपने यूट्यूब पर अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों का साक्षात्कार भी लिया है। नए युवा कवियों को साथ लेकर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का कार्य करते रहे हैं। आपकी दीर्घायु एवं साहित्य जगत में उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि कोटि शुभकामनाएँ। - शिवनलाल जलाली - दिल्ली

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Zsuzsa Gajdan

Painter, Hungary

Indu Kant Angirassal 2023-ban ismerkedtem meg. Naukuchiatalban az Utsah Toli kommunikációs kulturális centrumban indiai gyerekekkel magyar népmesét illusztráltunk. Ehhez nyújtott segítséget egy nagyszerű ember, barát Indu. Magyar népmeséket fordított hindire. Nagyon izgalmas feladat volt, hogyan értelmezik más kultúra mesevilágát az indiai gyerekek. Ekkor született az ötlet, hogy ez jelenjen meg könyv formájában is. Később segítséget nyújtott a Magyarországon működő: Igazgyöngy Alapítvány, Berettyóújfaluból. Ez az iskola 1999 ben alakult a gyerekszegénység felszámolásáért dolgozik. (Hasonló képen működik, mint az indiai Utsah Toli) Ezek a nehéz sorsú gyerekek készítették ezeket a csodálatos festményeket, a mese illusztrálásához. Köszönet érte! Köszönet Indu Kant Angirasnak a könyv megálmodójának. Gajdán Zsuzsa festőművész, Magyarország

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संतोष संप्रीति

साहित्य सेवी

दिल्ली में जन्मे इन्दुकांत आंगिरस 'रसिक देहलवी' हिंदी साहित्य और अनुवाद जगत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बहुआयामी हस्ताक्षर हैं। बहुभाषी प्रतिभा के धनी श्री आंगिरस हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू के साथ-साथ हंगेरियन, ग्रीक, चेख और लिथुआनिअन जैसी दुर्लभ यूरोपीय भाषाओं पर भी असाधारण पकड़ रखते हैं। 'परिचय साहित्य परिषद्' और 'सनद (ΣΑΝΑΔ) फाउंडेशन' के संस्थापक के रूप में वे साहित्य और समाज की निरंतर सेवा कर रहे हैं। उनके कई एकल कविता संग्रह (जैसे 'शहर और जंगल', 'गजरे') और अनूदित कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, और वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन व अनुवाद में पूरी निष्ठा से संलग्न हैं। उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक विशेषता विश्व साहित्य को हिंदी के करीब लाना है। उन्होंने हंगेरियन लोककथाओं ('तीन वरदान'), अरबी कविताओं और शांदोर पैतोफ़ी की रचनाओं का हिंदी में उत्कृष्ट अनुवाद करके भारतीय पाठकों के लिए वैश्विक साहित्य के द्वार खोले हैं। संतोष संप्रीति -दिल्ली

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Shakur Anwar

वरिष्ठ ग़ज़लकार

मैं ऐसा समझता हूँ कि मौजूदा जीवन शैली ने हमारी साहित्यिक सक्रियता को एक हद तक कम कर दिया है।हम लोग ज़माने के साथ आगे तो बढ़ रहे हैं मगर साहित्य और उसके मर्म से दूर होते जा रहे हैं।ऐसे नासाज़गार हालात में भी इन्दुकांत आंगिरस उर्फ़ रसिक देहलवी अपनी पुरअसर आवाज़ के माध्यम से मुख्तलिफ़ शायरों के कलाम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचा कर शेरो-अदब की बेलौस ख़िदमत अंजाम दे रहे हैं।मेरी ग़ज़लों को भी इन्होंने अपनी आवाज़ देकर पेश किया है।इनका ये मुनफ़रिद काम वाकई क़ाबिले तारीफ़ है ।आइंदा भी ये अपने काम को इसी जोशो खराश के साथ अंजाम देते रहेंगे। ख़ैर तलब - शकूर अनवर