कविता
प्रार्थना
एक बार फिर निकलता है सूरज एक और दिन की सज़ा देने हमसे हमारी ही साँसें लेने और हम सुबह , दोपहर , शाम भोग कर एक बार फिर रात में प्रार्थना करते हैं ईश्वर से अगली सुबह के लिए और एक दिन की सज़ा के लिए।
एक बार फिर निकलता है सूरज एक और दिन की सज़ा देने हमसे हमारी ही साँसें लेने और हम सुबह , दोपहर , शाम भोग कर एक बार फिर रात में प्रार्थना करते हैं ईश्वर से अगली सुबह के लिए और एक दिन की सज़ा के लिए।