कविता
गुलाब
भला लगता है मुझे अपने आँगन का यह गुलाब एक सम्बन्ध जुड़ा है मेरा इस गुलाब से , पर जाने क्यूँ इसकी डाली में सिर्फ़ बबूल उगते हैं , तुम्हीं कहो ! तुम्हीं ने बोया था यह गुलाब सिर्फ़ एक फूल पर उगते रहे बबूल , अब न जाने कब तक सहलाती रहेंगी मेरी उँगलियाँ इस बंजर गुलाब को।