कविता
आख़िर क्या होती है लघुकथा
जो वक़्त की क़ीमत को बेहतर समझती है जो अंधेरों में बिजली - सी चमकती है पढ़ ले जिसे आप कुछ पलों में जादू जिसका रहे सालों तक जो उतर जाये रूह में आपकी बस रहे न चंद ख़यालों तक, जो काली घटा - सी आये बरसने को और छोड़ जाये सबको तरसने को तार तार तो होता है दामन इसका लिखती अपने लहू से जब कोई क़िस्सा कभी आग कभी पानी , कभी लहरों की रवानी मुफ़लिस की जवानी होती है लघुकथा कुछ कविता , कुछ कहानी होती है लघुकथा।