गीत
सावन की रतियों में
सावन की रतियों में , मत जा रे बलम छोड़ के तोरण से मैं द्वार सजाऊँ चन्दन बंदन हार बनाऊँ बिरहन सी सूनी आँखों में तारों के मैं दीप जलाऊँ सावन की रतियों में , मत जा रे नयन मोड़ के तोड़ के सारे बंधन आ जा प्रेम को भी चन्दन कर जा सूने प्राणों में रंग भर कर मुझको फाल्गुन कर जा सावन की रतियों में , मत जा रे क़सम तोड़ के बैरन रतिया मोह तड़पाए आहट पे हर दिल घबराए साथ हमारा जन्मों का यूँ कान्हा के सँग राधा गाए सावन की रतियों में , मत जा रे भरम तोड़ के